रामायण में स्त्री-विमर्श: सीता, उर्मिला, अनुसूया, मन्दोदरी, कैकेयी एवं तारा के विशेष संदर्भ में
Vaishali Jaydipsinh Dodiya
भारतीय संस्कृति के महाकाव्यों में ‘रामायण’ न केवल मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के आदर्श जीवन का आख्यान है, अपितु वह नारी के विविध रूपों, भूमिकाओं एवं शक्तियों का दार्शनिक प्रतिपादन भी है। रामायण की नारी केवल गृहस्थ की मर्यादा की प्रतीक नहीं, बल्कि धर्म, नीति, त्याग और साहस की साक्षात मूर्ति है। इस शोध-पत्र में ‘सीता, उर्मिला, अनुसूया, मन्दोदरी, कैकेयी एवं तारा’ — इन छह प्रमुख स्त्री-पात्रों के माध्यम से स्त्री-विमर्श के विविध आयामों का विवेचन किया गया है। इन नारी पात्रों में पतिव्रता धर्म, मातृत्व, नीति, करुणा, विवेक, धैर्य और बुद्धिमत्ता का समन्वय दृष्टिगोचर होता है। रामायण की स्त्रियाँ भारतीय संस्कृति में नारी की आत्मशक्ति और उसकी नैतिक ऊँचाई का बोध कराती हैं।
Vaishali Jaydipsinh Dodiya. रामायण में स्त्री-विमर्श: सीता, उर्मिला, अनुसूया, मन्दोदरी, कैकेयी एवं तारा के विशेष संदर्भ में. Int J Sanskrit Res 2025;11(6):36-38.