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International Journal of Sanskrit Research
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International Journal of Sanskrit Research

2025, Vol. 11, Issue 5, Part A

गुरु-शिष्य परंपरा: भारत का प्राचीन ज्ञान और बुद्धिमत्ता का मार्ग, GSRQ (Guru Shishya Relationship Quotient) आधारित आकलन

गुरुसरन सिंह, सुरत प्यारी, रुबीना सक्सेना

यह शोध-पत्र "गुरु-शिष्य परंपरा: भारत का प्राचीन ज्ञान और बुद्धिमत्ता का मार्ग, GSRQ (Guru Shishya Relationship Quotient) आधारित आकलन" भारतीय शिक्षा एवं संस्कृति की उस अद्वितीय प्रणाली का गहन अध्ययन प्रस्तुत करता है, जिसने सदियों से ज्ञान, नैतिकता और आध्यात्मिक मूल्यों का संरक्षण और संवर्धन किया है। वैदिक काल से लेकर आधुनिक समय तक, यह परंपरा केवल शैक्षणिक ज्ञान के आदान-प्रदान तक सीमित नहीं रही, बल्कि व्यक्तित्व के समग्र विकास — आध्यात्मिक, मानसिक, बौद्धिक और नैतिक उन्नति — का प्रमुख माध्यम रही है।
प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली का मूल उद्देश्य मात्र साक्षरता नहीं, बल्कि चरित्र-निर्माण, जीवन-मूल्यों का संचार और समाजोपयोगी नागरिक का निर्माण था। वेद, उपनिषद, रामायण, महाभारत और अन्य धार्मिक-दार्शनिक ग्रंथों में वर्णित गुरु-शिष्य संबंधों के उदाहरण इस परंपरा की गहराई और प्रभाव को उजागर करते हैं। इसमें गुरु को भगवान से भी ऊँचा स्थान दिया गया है, क्योंकि वे शिष्य को अज्ञान रूपी अंधकार से निकालकर ज्ञान का प्रकाश प्रदान करते हैं।
इस शोध में Guru–Shishya Relationship Quotient (GSRQ) की एक नई अवधारणा प्रस्तुत की गई है, जो गुरु-शिष्य संबंधों में सम्मान, प्रेम, ज्ञान का आदान-प्रदान, नैतिकता, पारस्परिक विश्वास और आध्यात्मिक जुड़ाव जैसे कारकों को मापने का एक वैज्ञानिक प्रयास है। GSRQ का उद्देश्य शिक्षा में केवल बौद्धिक मूल्यांकन तक सीमित न रहकर मानवीय और सांस्कृतिक आयामों को भी आकलन में सम्मिलित करना है। शोध-पद्धति के अंतर्गत गुणात्मक विश्लेषण, ऐतिहासिक अध्ययन, पाठ्य समीक्षा तथा सांस्कृतिक दृष्टिकोण का समन्वय किया गया है। प्राचीन और आधुनिक शिक्षा पद्धतियों का तुलनात्मक अध्ययन यह स्पष्ट करता है कि आज के तकनीकी युग में भी गुरु-शिष्य परंपरा प्रासंगिक है, और विज्ञान व प्रौद्योगिकी के साथ इसके एकीकरण से शिक्षा अधिक मानवीय, मूल्य-आधारित और प्रभावी बन सकती है।
निष्कर्ष यह दर्शाते हैं कि गुरु-शिष्य परंपरा मात्र शिक्षा का एक माध्यम नहीं, बल्कि एक जीवन-दर्शन है, जो समाज में ज्ञान, नैतिकता और संस्कृति की नींव को मजबूत करता है और आज भी एक सतत प्रेरणास्रोत है।
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How to cite this article:
गुरुसरन सिंह, सुरत प्यारी, रुबीना सक्सेना. गुरु-शिष्य परंपरा: भारत का प्राचीन ज्ञान और बुद्धिमत्ता का मार्ग, GSRQ (Guru Shishya Relationship Quotient) आधारित आकलन. Int J Sanskrit Res 2025;11(5):04-11. DOI: 10.22271/23947519.2025.v11.i5a.2776

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