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International Journal of Sanskrit Research
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2025, Vol. 11, Issue 4, Part G

भगवान रामः एक आदर्श समाज निर्माण हेतु प्रेरणा स्रोत

प्रकाश, अनिता कुमारी

भगवान राम भारतीय संस्कृति के आधार हैं। मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में वर्णित उनका जीवन चरित्र आज भी हर भारतीय को चैतन्य बनाने हेतु सहायक सिद्ध होता है। वर्तमान भौतिकवादी युग में जहां हर व्यक्ति धन अर्जित करने एवं उसका संग्रह कर सुख प्राप्ति की दिशा में व्यस्त है वही भारतीय समाज में व्याप्त अनेक बुराइयां जैसे भ्रष्टाचार, हत्या, द्वेष, बलात्कार, नैतिक मूल्यों में कमी इत्यादि एक समाज के रूप में सुखी होने पर बहुत बड़ा प्रश्न चिन्ह खड़ा करती है। निश्चित रूप से यह दशा भारतीय समाज की भगवान राम से बढ़ती दूरी को दर्शाता है। भगवान राम का जन्म एक राजपरिवार में हुआ था जिन्होंने पुत्र मर्यादा का पालन करते हुए 14 वर्ष का वनवास स्वीकार किया था।वे माता कौशल्या के पुत्र थे लेकिन इन्हें कैकयी से भी माता तुल्य प्रेम था। पिता दशरथ के वचन की मर्यादा को रखने हेतु वे राजपाठ एवं महलों का सुख छोड़कर वन चले जाते हैं और वन में माता सीता एवं भ्राता लक्ष्मण के साथ त्याग का जीवन बिताते हैं। वनवास के दौरान उनको बड़े-बड़े महात्माओं का संग प्राप्त होता है और वे उनसे शिक्षा ग्रहण करते हैं एवं उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। इसी वनवास के दौरान उनकी भेंट अपने प्रिय भक्त हनुमान जी से होती है जिन्हें वे अपने अति प्रिय भाई भरत से भी ज्यादा प्रेम करते हैं। वनवास के दौरान ही उनकी भेंट निषादराज एवं केवट से होती है जिन्हें वे बहुत प्रेम करते हैं। माता शबरी के बेर खाकर वे धन्य हो जाते हैं। माता सीता के हरण के पश्चात वे रावण के भाई विभीषण एवं हनुमान जी की वानर सेना के साथ मिलकर लंका पर धावा बोल देते हैं जिसके फल स्वरुप रावण वध करके अधर्म पर धर्म की पताका को फहराते हैं। माता सीता एवं अपने प्रिय भक्तों के साथ अयोध्याजी लौट आते हैं और राजाराम बन जाते हैं उनके राज्य में चहुँओर सुख शांति एवं समृद्धि फैल जाती है। भगवान राम के कृत्यों पर प्रकाश डाले तो ऐसा प्रतीत होता है कि वे उच्च कोटि के बुद्धिमान एवं प्रेमी व्यक्ति हैं तभी तो वह त्याग को सहर्ष स्वीकार करते हैं तथा अपने से छोटी जाति के निषादराज एवं केवट से भी उतना ही प्रेम करते हैं जितना अपने भाई से। उन्हें प्रकृति से बहुत प्रेम होता है तभी तो वह जंगल में भी अन्य जीव-जंतुओं जैसे वानरों, जटायू सरीके पक्षी को भी अपना बना लेते हैं। मर्यादा पुरुषोत्तम की अर्चना एवं पूजा उनके जैसा बन जाने की मानवीय आकांक्षाओं को परिलक्षित करता है ताकि हर व्यक्ति संपूर्णतया और वास्तविक सुख एवं समृद्धि को प्राप्त कर सके जो चिरकालिक हो एवं संपूर्ण समाज उन्नति के पथ पर अग्रसर रह सके, इसी में संपूर्ण मानवता का हित भी है। यह अध्ययन भगवान राम के चरित्र की प्रमुख विशेषताओं के आधार पर उसे प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में चरितार्थ करने हेतु की गई एक खोज है जिससे वास्तविक धरातल पर उनके कृत्यों को उतारा जा सके ताकि प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन हो सके।
Pages : 430-432 | 419 Views | 105 Downloads


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How to cite this article:
प्रकाश, अनिता कुमारी. भगवान रामः एक आदर्श समाज निर्माण हेतु प्रेरणा स्रोत. Int J Sanskrit Res 2025;11(4):430-432. DOI: 10.22271/23947519.2025.v11.i4g.2773

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