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International Journal of Sanskrit Research
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International Journal of Sanskrit Research

2025, Vol. 11, Issue 4, Part B

महाकाव्य रामायण में वर्णित आदर्श राजधर्म

डॉ. सरोज कुमारी

आदि कवि वाल्मीकि संस्कृत साहित्य के विश्वप्रसिद्धि प्राप्त महान ऋषि है। अतः आदि कवि वाल्मीकि द्वारा लिखित रामायण विश्व साहित्य का प्रथम महाकाव्य है। जिसमें महाकाव्य के सभी प्रतिमान समाहित हैं और उसकी उपादेयता अद्यावधि सार्वकालिक एवं सार्वभौमिक है। सम्पूर्ण महाकाव्य राम के परम आदर्श जीवन का सांगोपाङ्ग व्याख्यान करता है, तथा इस विषय में अन्यान्य ग्रन्थ लिखे जा रहे हैं। यह अपनी विशालता बहुवैविध्य के कारण अधुना पर्यन्त वाद-विवाद तथा विमर्श-निष्कर्ष के आलोक में निरन्तरता का केन्द्र बना रहता है।
भारत की परम्परा में धर्मशास्त्रों को प्रमुख स्थान दिया गया है और धर्मशास्त्रों में राजधर्म के विषय में बताया गया है। रामायण के अनुसार राजधर्म के विविध पक्षों पर प्रकाश डाला गया है। रामायण काल में भले ही राज्य में राजतन्त्र था परन्तु राजनीतिक व्यवस्था में लोकतान्त्रिक व्यवस्था थी क्योंकि राजा के द्वारा प्रजानुरञ्जन के कार्य किये जाते थे। अतः रामायण के अनुसार राजधर्म के विषय में विस्तृत जानकारी प्राप्त होती है, जिसका पालन रघुवंश के प्रत्येक राजा ने किया।
Pages : 85-87 | 834 Views | 444 Downloads


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How to cite this article:
डॉ. सरोज कुमारी. महाकाव्य रामायण में वर्णित आदर्श राजधर्म. Int J Sanskrit Res 2025;11(4):85-87.

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