हिन्दी में आधुनिकता का उपयोग सर्वप्रथम अज्ञेय ने अपने उपन्यास ष्शेखर एक जीवनीष् में नैतिक मूल्यों को तोड़ते हुए रूपायित किया। आधुनिकतावाद परम्परा और इतिहास पर स्वचेतना को प्रश्रय देता है, इसीलिए उसमें परम्परा की स्वीकृति न होकर परम्परा के प्रति अवमानना और नकार है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विकास से उत्पन्न सामाजिक परिवर्तनों की उसमें स्वीकृति है। मानव स्वातन्त्रय, व्यक्ति चेतना की अभिव्यक्ति तथा रूपवादी और प्रयोगवादी शिल्प की वायसी भाषा में प्रस्तुति जैसी कतिपय प्रवृत्तियाँ ष्आधुनिकतावादष् में दिखाई पड़ती है। आधुनिकता का प्रारम्भ प्रथम विश्व युद्ध (1914) से माना जाता है। इसका प्रचलन लगभग आधी शती तक अंग्रेजी एवं अमेरिकन साहित्य में विषयवस्तु और शिल्प के स्तर पर विभिन्न साहित्यकारों यीट्स, इलियट, आडेन, कोनरेड़, लारेन्स, वर्जीनिया वुल्फ, वर्नार्ड शा, रिचर्डस, एफ.आर. लेविस की कृत्तियों में देखा जा सकता है।