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International Journal of Sanskrit Research
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International Journal of Sanskrit Research

2023, Vol. 9, Issue 1, Part D

राजस्थानी-साहित्य में शृंगार की ‘देहधार्य’ परम्परा के अन्तर्गत आभूषण

मलयज गंगवार, डॉ. मीनाक्षी गुप्ता

राजस्थानी-साहित्य में तलवार की टंकार और पायल की झंकार दोनों को समुचित स्थान मिला है। साहित्य में स्त्रियों की शृंगार-परम्परा के चतुर्विध प्रकारों- ’कचधार्य’ (केश-सज्जा), ’देहधार्य’ (देह का शृंगार), ’परिधेय’ (वस्त्रों से देहावरण करना) तथा ’विलेपन’ (सौन्दर्य व स्वास्थ्य के लिए विभिन्न वस्तुओं से देह-आलेपन करना) का उल्लेख मिलता है। शृंगार-परम्परा के ये चतुर्विध प्रकार वर्तमान काल में भी स्त्रियों के लिए ही नहीं, अपितु पुरुषों के लिए भी प्रासंगिक हैं। शृंगार-परम्परा की ’देहधार्य’ कला के अंतर्गत विविध प्रकार के आभूषणों से देह का शृंगार करना राजस्थानी संस्कृति में अत्यंत व्यापक व महत्वपूर्ण रहा है, जिसका राजस्थानी साहित्य में प्रचुरता से उल्लेख हुआ है। प्रस्तुत शोधपत्र में राजस्थानी एवं राजस्थान से सम्बंधित साहित्य में वर्णित विविध प्रकार के आभूषणों को स्त्री व पुरुषों द्वारा दैहिक अंगों पर धारण किये जाने के अनुसार वर्गीकृत व विवेचना करने का प्रयास किया गया है।
Pages : 220-226 | 494 Views | 305 Downloads


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How to cite this article:
मलयज गंगवार, डॉ. मीनाक्षी गुप्ता. राजस्थानी-साहित्य में शृंगार की ‘देहधार्य’ परम्परा के अन्तर्गत आभूषण. Int J Sanskrit Res 2023;9(1):220-226.

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