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International Journal of Sanskrit Research
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2022, Vol. 8, Issue 4, Part A
पाणिनीय अष्टाध्यायी में आत्मनेपद-व्यवस्था

तेज प्रकाश

पदऔरवाक्यकेअर्थकापूर्णतःशुद्धबोधहोसके, तदर्थहीव्याकरणशास्त्रमेंपरस्मैपदऔरआत्मनेपदकीव्यवस्थाकीगईहै, इससेपृथक्उभयपदकापरिगणनभीकियाजाताहै।जिनधातुओंसेपरस्मैपदऔरआत्मनेपदकाविधानहोताहै, वेधातुएँउभयपदीकहलातीहैं।परस्मैपदमेंधातुओंकेरूपसर्वसामान्यजनभीअनायासरूपमेंप्रयोगकरलेतेहैंकिन्तुवेआत्मनेपदकोक्लिष्टसमझआत्मनेपदकोपरिहेयबतातेहैं, संस्कृतभाषाकोदुरूहबताकरइससेदूरभागखड़ेहोतेहैं।अतएवआत्मनेपदक्याहै, कहाँ, किन-२धातुओंसेऔरकिन-२अवस्थाओंमेंहोताहै, इत्यादिकाध्यानरखतेहुएपाणिनीयपद्धतिकोसहजऔरसरलजानहीप्रस्तुतशोधलेखमेंअष्टाध्यायीमेंप्रसृतआत्मनेपदकीनियमन-व्यवस्थाकोप्रकाशितकरविवृतकरनेकायत्नकियागयाहै।
Pages : 09-14 | 102 Views | 27 Downloads
How to cite this article:
तेज प्रकाश. पाणिनीय अष्टाध्यायी में आत्मनेपद-व्यवस्था. Int J Sanskrit Res 2022;8(4):09-14. DOI: 10.22271/23947519.2022.v8.i4a.1795
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