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International Journal of Sanskrit Research
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2022, Vol. 8, Issue 3, Part E
स्याद्वाद के जनक आचार्य समन्तभद्र

Himanshu Devendra Joshi

स्याद्वाद जैनदर्शन के अंतर्गत किसी वस्तु के गुण को समझने, समझाने और अभिव्यक्त करने का सापेक्षिक सिद्धान्त है । प्रसिद्ध जैनाचार्य समन्तभद्र ने जैनपरम्परा में सर्वप्रथम ‘न्यायशब्द’ का प्रयोग किया और न्यायशास्त्र में स्याद्वाद का गुम्फन किया । प्रस्तुत लेख में आचार्य समन्तभद्र और उनकी प्रमुख दार्शनिक कृतिओं के विषय में चर्चा करके जैनन्याय के अंतर्गत स्याद्वाद का विश्लेषण किया गया है ।
Pages : 251-257 | 36 Views | 5 Downloads
How to cite this article:
Himanshu Devendra Joshi. स्याद्वाद के जनक आचार्य समन्तभद्र. Int J Sanskrit Res 2022;8(3):251-257.
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