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International Journal of Sanskrit Research
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International Journal of Sanskrit Research

2022, Vol. 8, Issue 2, Part E
शीर्षकपृष्ठम् भारतीयदर्शन और मानवमूल्य

डॉ. हेमन्त शर्मा

भारतीय संस्कृति प्राचीन काल से ही दर्शन एवं मानवमूल्यों की अनुगामी संस्कृति रही है । धर्मार्थकाममोक्ष की प्राप्ति में दर्शन एव मानवमूल्य दोनों की अपनी-अपनी भूमिका रही है । जहाँ दार्शनिक विचारधारा में त्रिविध दुःखों का नाश और तत्त्व की प्राप्ति मानवजीवन का परम ध्येय माना गया है । वहीं मानवीय मूल्य भी इसी दिशा में अग्रसर दिखाई देते हैं । तात्त्विकरूप से देखें तो दर्शन एवं मानवमूल्य दोनों ही प्राणीमात्र के कल्याण से समन्वित हैं, दोनों समाज के व्यावहारिक सन्तुलन एवं विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं । किन्तु दर्शन व्यवहारिक सिन्द्धान्तों के साथ-साथ आध्यात्मिक एवं वैज्ञानिक सिद्धान्तों की भी विवेचना करता है । विभिन्न मानवीय मूल्यों को भी दार्शनिक विचारधारा में देखा जा सकता है । मानवीयमूल्य मानव को महान बनाने में अतिमहत्त्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करते हैं । दर्शन में मानवमूल्य एवं मानवमूल्यों में दर्शन स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं । व्यावहारिक रूप से भी दोनों एक दूसरे में समाहित दिखाई देते हैं । भारतीय शास्त्रों में एक साथ दर्शन एवं मानवमूल्यों का उदात्त स्वरूप हमारे ऋषियों ने प्रस्तुत किया है । प्रस्तुत लेख में भारतीय दर्शन एवं मानवमूल्य के उसी स्वरूप को वर्णित करने का प्रयास किया गया है ।
Pages : 269-272 | 22 Views | 6 Downloads
How to cite this article:
डॉ. हेमन्त शर्मा. शीर्षकपृष्ठम् भारतीयदर्शन और मानवमूल्य. Int J Sanskrit Res 2022;8(2):269-272.
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