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International Journal of Sanskrit Research
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International Journal of Sanskrit Research

2020, Vol. 6, Issue 1, Part D
याज्ञवल्क्यस्मृति में वर्णित सप्तांग

डॉ. आनन्द कुमार

याज्ञवल्क्यस्मृति में एक सुदृढ़ राज्य की परिभाषा प्राप्त होती है। यहां राज्य को एक सजीव रचना के रूप में स्वीकार किया गया है जो राज्य को सजीव एकात्मक शासन-व्यवस्था के रूप में मान्यता प्रदान करता है। याज्ञवल्क्य इसे सात प्रकृति अर्थात् सप्तांग के रूप में निरूपित करते हैं। राजा के कार्यों और उसके द्वारा स्थापित शासन-व्यवस्था के आधार पर सप्तांगों का विवेचन इस शोध-पत्र में किया गया है। राज्य के सर्वांगीण विकास के लिए इन सातों अंगों का सुदृढ़ होना आवश्यक है। याज्ञवल्क्य ने राज्य-शासन में इनकी एक दूसरे के प्रति अंतरनिर्भरता पर बल दिया है।
Pages : 234-237 | 36 Views | 7 Downloads
How to cite this article:
डॉ. आनन्द कुमार. याज्ञवल्क्यस्मृति में वर्णित सप्तांग. Int J Sanskrit Res 2020;6(1):234-237.
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