भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है तथा इसकी जड़े हमारे प्राचीन समृद्ध समाज में प्राप्त हैं। यदि आज भारत विश्व की सबसे पुरानी सभ्यताओं में से एक है तो उसका प्रमुख कारण भारतीय प्राचीन ग्रंथ एवं शास्त्र हैं जिसमें समाज को नियंत्रित करने के लिए निश्चित व्यवस्था थी। प्राचीन काल में भारत में सुदृढ़ व्यवस्था विद्यमान थी। इसके साक्ष्य हमें प्राचीन साहित्य से प्राप्त होते हैं। प्रस्तुत लेख प्राचीन धर्म शास्त्रीय ग्रंथों में राज्य व्यवस्था की निश्चित व्यवस्था को दर्शाता है साथ ही यह भी निश्चित करता है कि किस प्रकार न्यायाधीश की संपूर्ण क्रियाएं शास्त्र सम्मत थी। ऐसा कहना गलत नहीं होगा कि भारतीय लोकतंत्र का सिद्धांत वेदों की ही देन है सभा और समिति का उल्लेख ऋग्वेद एवं अथर्ववेद दोनों में मिलता है जिसमें राजा मंत्री और विद्वानों से विचार विमर्श करने के बाद ही कोई फैसला लेता था। प्रस्तुत लेख के माध्यम से यह ज्ञात होगा कि प्राचीन भारत में राज्य व्यवस्था एवं न्याय व्यवस्था ठोस हुआ करती थी।