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International Journal of Sanskrit Research
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International Journal of Sanskrit Research

2017, Vol. 3, Issue 2, Part A
अक्षर-विभाजन व प्रमुख संज्ञाएँ-वाजसनेयीप्रातिशाख्य व ऋग्वेदप्रातिशाख्यग्रन्थों के परिप्रेक्ष्य में

संजय राम त्रिपाठी, डाॅ0 ओमकार मिश्र

वैदिक मन्त्रों के उच्चारण में स्वरों की महत्त्वपूर्ण भूमिका है। मन्त्रोच्चारण के समय उदात्त, अनुदात्त और स्वरित का सही उच्चारण न करने पर अनिष्ट होता है, इसीलिये स्वर-विषयक शुद्धता की दृष्टि से अक्षर-विभाजन का ज्ञान आवश्यक हो जाता है। इस विषय में सूक्ष्म तौर पर यह अध्ययन किया जायेगा कि कौन-सा व्यंजन किस स्वर का अंग होगा?
Pages : 15-18 | 538 Views | 21 Downloads
How to cite this article:
संजय राम त्रिपाठी, डाॅ0 ओमकार मिश्र. अक्षर-विभाजन व प्रमुख संज्ञाएँ-वाजसनेयीप्रातिशाख्य व ऋग्वेदप्रातिशाख्यग्रन्थों के परिप्रेक्ष्य में. Int J Sanskrit Res 2017;3(2):15-18.
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