महापुरुषो के जीवन-चरित्र का अध्ययन प्रत्येक मनुष्य के लिये प्रेरणा का स्रोत होता है | आदिकाल से लेकर आज की प्रगत मानव सभ्यता तक सामाजिक और सान्स्कृतिक उत्कर्ष के लिये जिन असंख्य महापुरुषो का योगदान रहा है, माधवकाल गोलवलकर उनमे से अन्यतम थे | उनका जीवन पूर्णरूप से राष्ट्र को समर्पित था | 'इदं राष्ट्राय इदं न मम ' का वैदिक मंत्र उनके जीवन मे साकार और सार्थक था | उनके जीवन -चरित्र को प्रकट करने वाला यह काव्य ग्रन्थ और इसके रचयिता दोनो ही प्रशन्सा के पात्र हैं | महाकवि प्रो. मिथिलाप्रसाद त्रिपाठी ने अपने लघुकाव्य ' माधवीयम् ' की भूमिका मे ही लिखा है - "परम पूज्य गुरुजी ( माधवराव गोलवलकर जी )का जीवन किसी महाकाव्य से कम नही है |" और "वैसे तो गुरुजी के जीवन का इतिवृत्त शब्दातीत है किन्तु फिर भी स्वान्तः सुखाय सूर्य के प्रकाश मे दीपक जलाना भी क्षम्य होगा ही ऐसा लगता है |"