जयशंकर प्रसाद की कहानियों में प्रयुक्त संवादात्मकता का सुक्ष्म विश्लेषण करने से पता चलता है कि हिन्दी कहानी साहित्य को कथ्य और शिल्प की दृष्टि से उत्तरोतर विकसित करने में इस रचनाकार का महत्वपूर्ण योगदान हे इसकी कहानियों में संवाद एवं बहुआयामी प्रयोग देखने को मिलता है। प्रसादजी ने अपने निजी व्यक्तित्व के अनुरूप भावमूलक दृष्टि का व्यापक प्रयोग किया है। इनकी कहानियों में प्रवृतियों का अनुकरण और प्रभाव पूरे विकास युग पर परिलक्षित होता है। प्रस्तुत आलेख में जयशंकर प्रसाद की कहानियों में संवाद तत्व की भाषापरक, शैलीपरक, कथ्यपरक और अन्य विधायी प्रभावों की दृष्टि से भाषा शैली का अध्ययन करने का प्रयास किया गया है।